Interventions: Sustainable Agriculture and Food Security:
Advocacy...

खाद्य सुरक्षा: सरकार समाज और मीडिया

30 जुलाई 2011

निदान फाउंडेशन ने पैरवी और गाँधी शांति प्रतिष्ठान के सहयोग से 30 जुलाई 2011 को 'खाद्य सुरक्षा: सरकार, समाज और मीडिया' पर राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन किया. सर्व सेवा संघ की अध्यक्ष और प्रख्यात गाँधीवादी नेता माननीया राधा भट्ट ने राष्ट्रीय विमर्श का उद्घाटन करते हुए कहा की अन्न के उत्पादन के साधनों से लेकर वितरण तक की सारी प्रक्रियाओं को विकेन्द्रित करें. उन्हें सरकारों के हाथों में नहीं, जन समाज व जन समुदाय के हाथों से संचालित होने दें. उत्पादन के साधनों पर इन समुदायों की प्राथमिकता, प्रबंधन व उपयोग करने का अधिकार सुनिश्चित करें. वह अपनी गरीबी स्वयं मिटा सकता है. वह अपने अन्न भंडार संचालित कर सकता है. वह अपने सक्षम बाज़ार खड़े कर सकता है. केवल सरकारें यह भ्रम मिटाएँ कि देश का जीडीपी बढ़ने से गरीबी या भुखमरी मिटेगी.

इस मौके पर कृषि विशेषज्ञ देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि देश में जीडीपी बढ़ाने की बेताबी में किसानों और गरीबों को भुला दिया गया है. सरकार जिस नीति पर चल रही है, उस पर ही चलती रही तो 2025 तक अपने देश में खेती की ज़मीन नहीं बचेगी. उन्होंने कहा की देश के कृषि विश्वविद्यालय यहाँ के किसानों के हित में नहीं हैं, हमें अपनी परंपरा में ही भविष्य के रास्ते खोजने पड़ेंगे.

इस राष्ट्रीय विमर्श में पर्यावरणविद अनुपम मिश्र के सान्निध्य में वरिष्ठ समाजकर्मी विजय प्रताप, सुरेन्द्र कुमार (सचिव, गाँधी शांति प्रतिष्ठान), अजय झा (निदेशक, पैरवी), अरविन्द मोहन, सुकांत नागार्जुन, मनोज पाण्डेय, डॉ. नीलम जैन, डॉ. अंजना बख्शी, सुधीर जैन, अवधेश कुमार ने भी अपने विचार रखे.

खाद्य सुरक्षा की गंभीरता को देखते हुए इस राष्ट्रीय विमर्श में राधा भट्ट की ओर से विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को एक-एक किलो अनाज दिया गया ताकि वे इस अनाज को अपने राज्यों में ले जाकर इसकी मात्रा को बढ़ाएंगे व अपने आस-पास के इलाके में गरीबों को तलाशेंगे और उनके बीच अनाज का वितरण करेंगे. इस अभियान का नाम अन्नपूर्णा अभियान रखा गया, जिसमे कोई भी व्यक्ति जुड़ सकता है.