लाखों के पीछे बचपन

किशोरों को जेल में रखना किशोर न्याय की मूल भावना के खिलाफ है. किशोरों को वयस्कों के लिए बनाए जेल में रखा जाना किशोर न्याय अधिनियम का खुला उल्लंघन है. खुलेआम न केवल किशोरों को जेल में भेजा जा रहा है बल्कि ऐसी घटनाएँ दिनों-दिन बढ़ रही हैं. हालाँकि इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है कि प्रदेश की जेलों में कितने बच्चे बंद हैं लेकिन बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के 'बंदियों की स्थिति रिपोर्ट 2015' के मुताबिक प्रदेश की 58 जेलों में कुल 476 बच्चे बंद हैं...

Status of Taungya Settlements in the Terai Region of Uttarakhand

The taungya system was devised by the forest department during the colonial rule in the early years of the century along with the policy of reservation of forests by the government, obviously as a means of procuring cheap in fact free labor for laying and protecting new plantations often in place of the newly exploited and clear-felled natural forests...

उत्तर प्रदेश में डिलीवरी वर्कर्स की स्थिति; लखनऊ - एक अध्ययन

ई-कॉमर्स कंपनियों के बढ़ते व्यापार के साथ ही डिलीवरी वर्कर्स की मांग बढ़ती जा रही है. लखनऊ जैसे शहर में ही विभिन्न ई-कॉमर्स कंपनियों के दस हज़ार से भी ज्यादा डिलीवरी वर्कर्स काम कर रहे है. ये डिलीवरी वर्कर्स असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की श्रेणी में आते है. ज़्यादातर कम्पनियाँ इन्हें थर्ड पार्टी के ज़रिये काम पर रखती हैं और यह उनके लिए किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर होते हैं...

अभावों में रहने को मजबूर मदनमहल के विस्थापित

शहर के निर्माण और विकास में शहरी ग़रीब, मेहनतकश वर्ग का बड़ा योगदान होता है. इनके बिना शहरी विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती. मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले इन्हीं मेहनतकश ग़रीबों की वर्षों की मेहनत से तिनका-तिनका जोड़ कर बनाए गए आशियानों पर जनवरी 2019 में जेसीबी के क्रूर पंजे का प्रहार हुआ और उन्हें शहर से लगभग 18 किमी दूर कचरा ढोने वाली गाड़ियों से कचरे की तरह ही फेंक दिया गया...

इन मासूमों की मौत का ज़िम्मेदार कौन?

मुजफ्फरपुर जिला में चमकी बुखार से साल 2019 में पांच जुलाई तक 150 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.  स्वास्थ्य अधिसंरचना के मामले में बिहार की हालत चिंताजनक बनी हुई है. प्रति दस लाख की आबादी पर स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या साल 2012 में 109 थी जो कि 2018 में घटकर 99 रह गई है...

Improving the Human Rights Conditions of Beedi Workers in India

Beedi industry is generally located in unorganized sector. However beedi rolling began in the factory sector, over the last three decades manufacturing has shifted to ‘households, small unincorporated units and into small work sheds.

Halting the Hate - Social Responses to Restore the Harmony

Hate crime‟ has not been defined in Indian jurisprudence and therefore it is handled the same way as that of a conventional crime ignoring the acute differences between the two. A hate crime is a conventional offense but with an added element of bias...

Cyber Crime; Being Mean Behind the Screen 

In the current era of online processing, maximum of the information is online and prone to cyber threats. There are a huge number of cyber threats and their behavior is difficult to early understanding hence difficult to restrict in the early phases of the cyber attacks. Cyber attacks may have some motivation behind it or may be processed unknowingly...

Children and law : An insight into the juvenile legal system of India

in India, despite of being the largest democracy in the world, judiciary is on the weaker edge. Laws are made and policies are formulated in order to make justice accessible to all, but due to lack of infrastructure and implementation, these laws and policies does not end up into something effective and fail to serve the society with needed solutions.

Access to Safe Drinking Water in Primary Schools in Rural Bihar - A Fact Finding

It is estimated that around 37.7 million Indians are affected by waterborne diseases annually, 1.5 million children are estimated to die of diarrhoea alone and 73 million working days are lost due to waterborne disease each year. The resulting economic burden is estimated at 36,600 crore a year.

DAAYAN - A Fact Finding

Recently a brutal case of witch hunting was reported by media in August 2015. The tragic incident of lynching of five women, mainly from tribal community, branded as witches by a group of villagers took place at Maray Toli, 2.5 kilometer away from Mandar police station in outskirt of capital city Ranchi in Jharkhand. Usually women were killed in the name of witch hunting in Jharkhand but this time the incident was different.

Atrocities on Dalits in Rajasthan

As per the latest report Rajasthan recorded 573 cases of crime against dalit per million people as against the national average of 223 cases. Rajasthan witnessed the serious violation of rights of the dalits, marginalized and under privileged especially women.

Policing in India

Police is the primary agency for public’s interface with the government. It acts as an enforcement arm of the government to preserve the public order and tranquillity in society. It has both power and legitimate authority to uphold and enforce the laws, investigate crime and ensure security in the country.

Refugee Crisis and Amendment in the Citizenship Law

Citizenship law has been a delicate subject in India ever since independence particularly after large scale movement of people during partition and the recurrent influx of refugees because of domestic instability in neighbouring countries. The Citizenship Act of 1955 has been amended five times until now.

Removing the Barriers in Access to Justice

A welfare state governed by the Constitution ensuring welfare for its citizens cannot work without ensuring the Rule of Law which can be understood as equal treatment of all the citizens by the law of the land. For establishing the Rule of Law it is mandatory for a nation to make sure that all its citizens have equal and open access to justice.

बिहार: विकास के हाशिये पर खड़ा दलित

बिहार में दलितों की आबादी लगभग 16 प्रतिशत है. भारत के सभी नागरिकों के लिए कानून के समक्ष समानता और मूलभूत मानवाधिकार और नागरिक अधिकार सुनिश्चित करने वाले संविधान को अपनाने के छ: दशक से अधिक बीत जाने के बाद भी इनके प्रति भेदभाव बदस्तूर जारी है.

भारिया: विकास का वर्तमान परिदृश्य

मध्य प्रदेश के ज़िला छिन्दवाड़ा के पातालकोट क्षेत्र में रहने वाली आदिम जनजाति भारिया की स्थिति विभिन्न पहलुओं पर चिंताजनक है. ख़ासकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार के संबंध में. जैसे कि पातालकोट के विद्यालयों में शिक्षकों का अभाव है. क्षेत्र में चिकित्सक नहीं हैं, नतीजतन रोगियों की मृत्यु तक की गंभीर स्थितियाँ निर्मित हो जाती हैं. मार्च-अप्रैल में रोज़गार के लिए अस्थायी पलायन के कारण गाँव सूने हो जाते हैं. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और जल-जंगल-ज़मीन से जुड़ी दुश्वारियाँ भी भारिया समुदाय के जीवन का हिस्सा हैं.

दिव्यांग बच्चे और शिक्षा; वर्तमान परिदृश्य, प्रयास व चुनौतियाँ

मध्य प्रदेश के ज़िला भोपाल में दिव्यांग बच्चों की शैक्षणिक स्थिति पर पैरवी, नई दिल्ली व निवसिड बचपन, भोपाल की रिपोर्ट.

वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में दिव्यांग बच्चों की स्थिति जानने के लिए की गई इस फैक्ट फाइंडिंग में जो तथ्य निकलकर सामने आए वह इन बच्चों के प्रति हमारे सामाजिक दृष्टिकोण, राजनैतिक व संस्थागत ज़िम्मेदारी व प्रयासों में गंभीरता की कमी को प्रदर्शित करते हैं.

उत्तर प्रदेश, भूमि सुधार और वंचित वर्ग

उत्तर प्रदेश जनसँख्या के हिसाब से देश का सबसे बड़ा राज्य है. आर्थिक व सामाजिक जनगणना 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि-भूमिहीन है और इन भूमिहीन परिवारों में अधिकांश दलित व वंचित समुदाय के परिवार हैं.

Human Rights in the Cold in the Coal Capital

Report of the independent Fact Finding Committee in the matter unlawful arrest and detention and custodial torture leading to the death of Akhilesh Shah, custodial torture of Sanjay Shah, and death of Naqeeb Ahmad Siddiqui due to uprovoked police firing in Singrauli, Madhya Pradesh, in December 2013.

Working of Malnutrition Treatment Centers
An Assessment of MTCs in Rajasthan

This report develops an analysis of the situation from field perspectives, to screen the performance of MTCs in treatment of severe acute malnutrition and raise major gaps in management of malnutrition.

Jharkhand MTCs Assessment

India is home to 40 percent of the world’s malnourished children and 35 percent of the developing world’s low-birth-weight infants; every year 2.5 million children die in India, accounting for one in five deaths in the world. More than half of these deaths could be prevented if children were well nourished.

सरकारी योजनाएं: हमारे मुद्दे

भारतीय संसद के 15वें लोकसभा चुनावों के कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा निर्वाचन आयोग द्वारा कर दी गई है. किसी भी लोकतंत्र की दृढ़ता इस तथ्य से परिलक्षित होती है कि उस लोकतंत्र के नागरिक कितने सशक्त हैं. नागरिकों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सहभागिता जितनी अधिक होगी, उस देश का लोकतंत्र भी उतना ही सशक्त होगा.

रोज़गार अधिकार मंच (संक्षिप्त रिपोर्ट)

बिहार और झारखण्ड में नरेगा की वर्तमान स्थितियाँ चिंतनीय हैं. इन्ही स्थितियों को केंद्र में रखते हुए एक लम्बे अरसे से इस बात की आवश्यकता महसूस की जा रही थी कि नरेगा के सफल क्रियान्वयन को मज़बूत करने के लिए कोई सार्थक कदम उठाने की आवश्यकता है. इसी का परिणाम है पैरवी, नई दिल्ली की पहल पर बिहार-झारखण्ड की विभिन्न संस्थाओं द्वारा रोज़गार अधिकार मंच का गठन.

नरेगा में भुगतान की स्थिति: एक शोध

ग्रामीण भारत में आजीविका की सुरक्षा के मद्देनज़र राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी अधिनियम एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. परन्तु पिछले अनुभव और गंभीर अनियमितताओं की निरंतर आने वाली ख़बरें यह प्रश्न उठाते है की वास्तविक स्वरूप में नरेगा किस हद तक लोगों को आजीविका और सुरक्षा प्रदान कर रहा है.

Human Rights concerns and Challenges in Bihar

A state consultation was organized by Pairvi and NIDAN on "Human rights concerns and challenges in Bihar" which was held on 20th December 2008, SCADA Business centre, Patna, Bihar.

Elect to End Atrocities

In India, every day 27 atrocities, 13 murder, 5 home or possesion burning, 6 kidnap/abduction, 3 rape, 11 beating cases take place against dalits. In every 18 minutes a crime take place against the dalits. This is not only a crime against a faceless, powerless and defenseless dalit, but a crime against the community, nation and humanity.

उत्तर प्रदेश में दलित

व्यक्तिगत स्तर पर या वर्ग विशेष का उत्पीड़न विकासशील एवं विकसित दोनों ही प्रकार के देशों में लम्बे अरसे से चिंतन के लिए एक गंभीर मुद्दा रहा है. विभिन्न सामाजिक असमानताओं और शक्ति विभाजन के ढांचे की मौजूदगी के कारण भारतीय समाज की संरचना उत्पीड़न के अनुभवों और शोषित वर्ग के जीवन को समझने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान प्रदान करती है.

राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी योजना

अधिकारों की प्राप्ति में गरीबी सबसे बड़ा बाधक है. कीन्स के सिद्धांतों पर आधारित गरीबी उन्मूलन प्रयास लोगों को रोज़गार के अवसर प्रदान करके उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर लेन पर केन्द्रित रहे हैं. हालाँकि ऐसा नहीं माना जा सकता की रोज़गार अन्य अधिकारों की प्राप्ति की कुंजी या गारंटी है लेकिन इतना अवश्य कहा जा सकता है कि रोज़गार अन्य अधिकारों के उपभोग की संभावना को अवश्य प्रबल करता है...

Emancipation of Bonded Labour:  Still a Far Cry

A Field Report from  Santhal Pargana (Jharkhand)
In the beginning of 1980s, The Lok Samiti, an off-shoot of the Bihar Movement, had taken up a programme of identification and release of bonded labourers, in terms of the Bonded Labour System Abolition Act, 1976, in Deoghar, Mohanpur...

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