जलवायु परिवर्तन; वर्षा आधारित क्षेत्रों पर प्रभाव - जन सुनवाई

4 नवम्बर 2009 को आयोजित इस जन-सुनवाई में भारत के 12 राज्यों से 350 से अधिक लोगों ने अपने राज्यों/क्षेत्रों के जन-जीवन पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर चर्चा की. यह प्रकाशन प्रस्तुत किये गए साक्ष्यों का संकलन है.

जलवायु संकट: पीड़ितों की ज़ुबानी

इस पुस्तिका में जलवायु परिवर्तन के भयावह परिणामों से पीड़ित विभिन्न प्रदेशों के भिन्न-भिन्न समुदायों के लोगों की कहानियों को संकलित किया गया है जिनमें मानवाधिकार हनन, विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों और स्थानों - जो बहुत अधिक प्रभावित हुए हैं - की स्थितियों को उन्हीं के शब्दों में व्यक्त किया गया है.

Large Energy Projects: Threat to Ecosystems, Biodeversity, Livelihoods and Democracy

India and many developing countries like it, is pursuing massive projects to produce electricity in vast numbers, and the overwhelming majority of these are giant coal-fired thermal power plants...

National Peoples Tribunal of Climate Crisis

The National people’s Tribunal was organized by a host of civil society organizations including CECOEDECON, PAIRVI, Beyond Copenhagen, SADED, Accion Fraterna and many others to look into the legal space available for state responsibility and responsibility of developed nations...

Policy Brief on SDG Goal 2

The current paper looks at SDG 2 and its potential to eradicate hunger and malnutrition in India and globally. The paper argues that the SDG2 and current approaches towards reducing hunger and malnutrition is flawed as it is not based on current realities.

Rio +20 Equity & Rights as Missing Link

It has been twenty years since the watershed event for sustainable development 'Earth Summit, 1992' was held in Rio De Janeiro, Brazil. Twenty years on, states and civil society gather at the United Nations Commission on Sustainable Development (UNCSD) in June 2012 at Rio yet again...

SDG 13; Take Urgent Action to Combat Climate Change and It's Impact

193 countries adopted the sustainable development goals (SDGs) in September 2015. SDGs are a set of 17 goals emerging out of intergovernmental negotiations of over two and half years, to integrate three pillars of development, economic, social and environmental...

Sustainable Development Goals and Post 2015 Development Agenda of the United Nations; Some Concerns

UN Conference on sustainable development in June 2013 set afoot a number of processes led by the UN with the primary objective of making the growth sustainable and inclusive, and integrate economic, social and environmental dimension of growth...

सतत् विकास लक्ष्य और 2015 के बाद विकास

जून 2013 में रियो में सतत् विकास की अंतर्राष्ट्रीय बैठक के बाद राष्ट्रसंघ के नेतृत्व में कई प्रक्रियाएँ चलाई गईं जिसका मूल उद्देश्य था कि सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय विकास में सामंजस्य लाकर दुनिया में विकास को समावेशी, संतुलित और स्थायी बनाया जाए...

SDGs: Proposal of the Open Working Group

The outcome document of the United Nations Conference on Sustainable Development, entitled “The future we want”, inter alia, set out a mandate to establish an open working group to develop a set of sustainable development goals for consideration and appropriate action by the General Assembly...

The Incomplete Idiots' Guide to COP15

At the 15th Conference of the Parties in Copenhagen, the key issues which will be under discussion will include: The baseline year that specified reduction targets will be measured against and the duration of the second commitment period...

Trade and  Human Rights; RCEP, an Emerging Challenge

RCEP is being negotiated in the shrouds of secrecy. There is no text available to the public and it raises suspicion. The general feeling in the past decade has moved against such trade agreements done to a number of reasons. There have been very few consultations with stakeholders...

Climate Change and Food Security in South Asia
A Framework for Regional Cooperation

While climate change is now widely perceived as perhaps the most serious and complex problem of the times ahead, at the same time South Asia has been often identified as an area where very serious impacts of climate change may be manifested in the near future

Myth of Climate Smart Agriculture

The climate smart agriculture being pushed down the throats of small farmers in the world is advocated as triple win, increased food production, cash for poor farmers and climate resilience in farming. It sounds impressive. However, there are no models yet to show that it can happen the way which is being proposed.

खुदरा व्यापर में विदेशी निवेश

सरकार नव-उदारवादी नीति की राह पर चल रही है और विदेशी निवेश का बढ़ावा इसका प्रमुख हिस्सा है. देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति के मद्देनज़र ,एफडीआई को प्रमुख समाधान के रूप में देखा जा रहा है. खुदरा व्यापर अब तक अनछुआ था लेकिन एक ही बार में सरकार ने 51 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति दे दी है जिससे देश के लगभग 4 करोड़ खुदरा व्यापारियों के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है.

Agriculture and Climate Change; Peasant Farming in Crisis

Climate change is not only an environmental issue but a defining problem for generations to come which can slow down the pace of progress towards sustainable development either directly or through increased exposure to adverse impact or indirectly through erosion of the capacity to adapt.

भारिया: विकास का वर्तमान परिदृश्य

मध्य प्रदेश के ज़िला छिन्दवाड़ा के पातालकोट क्षेत्र में रहने वाली आदिम जनजाति भारिया की स्थिति विभिन्न पहलुओं पर चिंताजनक है. ख़ासकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार के संबंध में. जैसे कि पातालकोट के विद्यालयों में शिक्षकों का अभाव है. क्षेत्र में चिकित्सक नहीं हैं, नतीजतन रोगियों की मृत्यु तक की गंभीर स्थितियाँ निर्मित हो जाती हैं. मार्च-अप्रैल में रोज़गार के लिए अस्थायी पलायन के कारण गाँव सूने हो जाते हैं. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और जल-जंगल-ज़मीन से जुड़ी दुश्वारियाँ भी भारिया समुदाय के जीवन का हिस्सा हैं.

दिव्यांग बच्चे और शिक्षा; वर्तमान परिदृश्य, प्रयास व चुनौतियाँ

मध्य प्रदेश के ज़िला भोपाल में दिव्यांग बच्चों की शैक्षणिक स्थिति पर पैरवी, नई दिल्ली व निवसिड बचपन, भोपाल की रिपोर्ट.

वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में दिव्यांग बच्चों की स्थिति जानने के लिए की गई इस फैक्ट फाइंडिंग में जो तथ्य निकलकर सामने आए वह इन बच्चों के प्रति हमारे सामाजिक दृष्टिकोण, राजनैतिक व संस्थागत ज़िम्मेदारी व प्रयासों में गंभीरता की कमी को प्रदर्शित करते हैं.

उत्तर प्रदेश, भूमि सुधार और वंचित वर्ग

उत्तर प्रदेश जनसँख्या के हिसाब से देश का सबसे बड़ा राज्य है. आर्थिक व सामाजिक जनगणना 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि-भूमिहीन है और इन भूमिहीन परिवारों में अधिकांश दलित व वंचित समुदाय के परिवार हैं.

Human Rights in the Cold in the Coal Capital

Report of the independent Fact Finding Committee in the matter unlawful arrest and detention and custodial torture leading to the death of Akhilesh Shah, custodial torture of Sanjay Shah, and death of Naqeeb Ahmad Siddiqui due to uprovoked police firing in Singrauli, Madhya Pradesh, in December 2013.

Working of Malnutrition Treatment Centers
An Assessment of MTCs in Rajasthan

This report develops an analysis of the situation from field perspectives, to screen the performance of MTCs in treatment of severe acute malnutrition and raise major gaps in management of malnutrition.

Jharkhand MTCs Assessment

India is home to 40 percent of the world’s malnourished children and 35 percent of the developing world’s low-birth-weight infants; every year 2.5 million children die in India, accounting for one in five deaths in the world. More than half of these deaths could be prevented if children were well nourished.

सरकारी योजनाएं: हमारे मुद्दे

भारतीय संसद के 15वें लोकसभा चुनावों के कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा निर्वाचन आयोग द्वारा कर दी गई है. किसी भी लोकतंत्र की दृढ़ता इस तथ्य से परिलक्षित होती है कि उस लोकतंत्र के नागरिक कितने सशक्त हैं. नागरिकों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सहभागिता जितनी अधिक होगी, उस देश का लोकतंत्र भी उतना ही सशक्त होगा.

रोज़गार अधिकार मंच (संक्षिप्त रिपोर्ट)

बिहार और झारखण्ड में नरेगा की वर्तमान स्थितियाँ चिंतनीय हैं. इन्ही स्थितियों को केंद्र में रखते हुए एक लम्बे अरसे से इस बात की आवश्यकता महसूस की जा रही थी कि नरेगा के सफल क्रियान्वयन को मज़बूत करने के लिए कोई सार्थक कदम उठाने की आवश्यकता है. इसी का परिणाम है पैरवी, नई दिल्ली की पहल पर बिहार-झारखण्ड की विभिन्न संस्थाओं द्वारा रोज़गार अधिकार मंच का गठन.

नरेगा में भुगतान की स्थिति: एक शोध

ग्रामीण भारत में आजीविका की सुरक्षा के मद्देनज़र राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी अधिनियम एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. परन्तु पिछले अनुभव और गंभीर अनियमितताओं की निरंतर आने वाली ख़बरें यह प्रश्न उठाते है की वास्तविक स्वरूप में नरेगा किस हद तक लोगों को आजीविका और सुरक्षा प्रदान कर रहा है.

Human Rights concerns and Challenges in Bihar

A state consultation was organized by Pairvi and NIDAN on "Human rights concerns and challenges in Bihar" which was held on 20th December 2008, SCADA Business centre, Patna, Bihar.

Elect to End Atrocities

In India, every day 27 atrocities, 13 murder, 5 home or possesion burning, 6 kidnap/abduction, 3 rape, 11 beating cases take place against dalits. In every 18 minutes a crime take place against the dalits. This is not only a crime against a faceless, powerless and defenseless dalit, but a crime against the community, nation and humanity.

उत्तर प्रदेश में दलित

व्यक्तिगत स्तर पर या वर्ग विशेष का उत्पीड़न विकासशील एवं विकसित दोनों ही प्रकार के देशों में लम्बे अरसे से चिंतन के लिए एक गंभीर मुद्दा रहा है. विभिन्न सामाजिक असमानताओं और शक्ति विभाजन के ढांचे की मौजूदगी के कारण भारतीय समाज की संरचना उत्पीड़न के अनुभवों और शोषित वर्ग के जीवन को समझने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान प्रदान करती है.

राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी योजना

अधिकारों की प्राप्ति में गरीबी सबसे बड़ा बाधक है. कीन्स के सिद्धांतों पर आधारित गरीबी उन्मूलन प्रयास लोगों को रोज़गार के अवसर प्रदान करके उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर लेन पर केन्द्रित रहे हैं. हालाँकि ऐसा नहीं माना जा सकता की रोज़गार अन्य अधिकारों की प्राप्ति की कुंजी या गारंटी है लेकिन इतना अवश्य कहा जा सकता है कि रोज़गार अन्य अधिकारों के उपभोग की संभावना को अवश्य प्रबल करता है...

Emancipation of Bonded Labour:  Still a Far Cry

A Field Report from  Santhal Pargana (Jharkhand)
In the beginning of 1980s, The Lok Samiti, an off-shoot of the Bihar Movement, had taken up a programme of identification and release of bonded labourers, in terms of the Bonded Labour System Abolition Act, 1976, in Deoghar, Mohanpur...

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